बुधवार, 27 मई 2009

गर्मी का असर

निर्जल नदिया हो गयी सूख गये सब कूप
मारी मारी फिर रही विचलित प्‍यासी धूप

गर्मी के हथियार से सूरज करता चोट
सिकुड़ सिकुड़ छाया छुपै ले तरूवर की ओट

सास बहू पर कर रही जो निर्मम अन्‍याय
धूप धरा पर मारती कस कस कोड़े हाय

पत्‍ता पत्‍ता तप रहा चढ़ता ताप असीम
शीतल कैसे हों भला क्‍या चंदन क्‍या नीम

11 टिप्‍पणियां:

  1. सास बहु पर कर रही जो निर्मम अन्याय
    धूप धरा पर मारती कस कस कोडे हाय

    अद्भुत दोहे कहें हैं आपने गर्मी पर...नए बिम्ब और नया रंग दिखाई दिया इन दोहों में...साधुवाद इस उत्कृष्ट रचना के लिए...
    नीरज

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  2. गर्मी का असर सरकार और सेंसेक्‍स दोनों पर भी तो पड़ रहा है। इसलिए मंत्रिमंडल बढ़ और सेंसेक्‍स आज चढ़ रहा है।

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  3. dhaartee tapee, gagan tapa, tap raha insaan...
    khud kee galtee ka fal bhoge , jag moorak hai agyaan...

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  4. बहुत ही बढ़िया....अद्भुत....सुन्दर....मन जैसे तरबूज-तरबूज हो गया....आम और लीची में खो गया....अब हम ककडी खाएँगे....और छाछ के गिलास में खो जायेंगे......!!

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  5. भाई वाह !

    मान गए दोहों की मारक छमता .

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  6. बहुत गरमा गरम दोहे हैं गरमी को और बढा दिया है
    इस गरमी मे आज नया अन्दाज़ कहाँ से पाया है
    दो दिन से बिन बिजली पानी पप्पू नहि नहाया है
    ना बर्तन ना साफ सफाई गरमी ने कहर मचाया है
    उपर से ये टिप्प्णी करना कैसा जमाना आया है
    अविनश्जी बहुत बद्डिया दोहे हैन बधाई

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  7. आजकल बहुओं का ज़माना है ....
    गर्मी के दोहों ने रंग जमा दिया .....

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  8. धरा आज है,तप रही,सूरज भी जलता दिखे,
    नदियाँ नीर बिना सुनी,हिमगिरी भी गलता दिखे,
    छाया देते जो तरुवर थे,एक बात कह जाए,
    मन मे शीतलता रखो,जग शीतल हो जाए.

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टिप्‍पणी की खट खट
सच्‍चाई की है आहट
डर कर मत दूर हट