बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

एक नन्‍ही पहेली

मैं तो तेरी रक्षा करता तू रोंदे मेरे तन को
घर के अंदर आने न दे कैसे रोउं जीवन को


पिछली वानर वाली पहेली का उत्‍तर था ' पटाखा '

8 टिप्‍पणियां:

  1. pavan ji

    Namaskar

    mere khyaal se ye " ghaas " hai....

    agar uttar sahi ho to kuch inam avasha deve.
    iski bahut jarurat hai ji ..

    is post ke liye meri badhai sweekar kare..

    regards

    vijay
    www.poemsofvijay.blogspot.com

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टिप्‍पणी की खट खट
सच्‍चाई की है आहट
डर कर मत दूर हट