गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

संदीप उन्‍नीकृष्‍णन को नमन

चाहता हूं तुझको तेरे नाम से पुकार लूं
ऐ शहीद आ तेरी मैं आरती उतार लूं

जिस कोख ने पैदा किया उस कोख का ऐहसान है
सैनिकों के रक्‍त से आबाद हिन्‍दुस्‍तान है
धन्‍य है मइया तुम्‍हारी भेंट में बलिदान में
झुक गया है देश उसके दूध के सम्‍मान में

दे दिया है लाल जिसने पुत्रमोह छोड़कर
चाहता हूं प्‍यार से पांव वो पखार दूं
ऐ शहीद आ तेरी मैं आरती उतार लूं

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया और सामयिक रचना प्रेषित की है।उन शहीदो के आगे हम सदा नतमस्तक रहेगें।

    चाहता हूं तुझको तेरे नाम से पुकार लूं
    ऐ शहीद आ तेरी मैं आरती उतार लूं

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  2. चाहता हूं तुझको तेरे नाम से पुकार लूं
    ऐ शहीद आ तेरी मैं आरती उतार लूं
    "hr bhartiye ke dil ki aavaj ko shabd de diye aapne"

    Regards

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टिप्‍पणी की खट खट
सच्‍चाई की है आहट
डर कर मत दूर हट