कौन जाने क्या हुआ कैसे हुआ
आरुषि की मौत ने दिल को छुआ
प्रश्न जो उत्तर बिना हैं आज तक
क्यों मसल डाली कली कचनार की
कौन कहता आरुषि तू मर गयी
खूबसूरत जिंदगी से डर गयी
हर वक़्त रहती है नज़र के सामने
रोज बनती है खबर अखबार की
रविवार, 15 जून 2008
रविवार, 8 जून 2008
तितली की सलाह
तितली तू क्या खाती है, ये रंग कहां से लाती है
कर श्रंगार दुल्हन जैसा, तू रोज कहां पर जाती है
क्यों प्रश्न उठा तेरे मन में, मैं जाती हूं वन-उपवन में
ये असर हुआ है फूलों का जो रंग भरें मेरे जीवन में
तुम भी उपवन तैयार करो फूलों पौधों से प्यार करो
जीवन में रंग सजेंगे खुद तुम जीवों पर उपकार करो
कर श्रंगार दुल्हन जैसा, तू रोज कहां पर जाती है
क्यों प्रश्न उठा तेरे मन में, मैं जाती हूं वन-उपवन में
ये असर हुआ है फूलों का जो रंग भरें मेरे जीवन में
तुम भी उपवन तैयार करो फूलों पौधों से प्यार करो
जीवन में रंग सजेंगे खुद तुम जीवों पर उपकार करो
शनिवार, 31 मई 2008
लोग कहते हैं, ये तो कहते ही रहेंगे
करने को हाथ पीले बाबुल का भाग्य कैसा
देता दहेज वर को लेकर उधार पैसा
वो कर्ज में दबेगा ये नोट हैं लुटाते
खुलती है रम की बोतल लब जा़म से लगाते
यूं ही सब पैसे की बरबादी हो रही है
लोग कहते हैं
शादी हो रही है
देता दहेज वर को लेकर उधार पैसा
वो कर्ज में दबेगा ये नोट हैं लुटाते
खुलती है रम की बोतल लब जा़म से लगाते
यूं ही सब पैसे की बरबादी हो रही है
लोग कहते हैं
शादी हो रही है
शुक्रवार, 30 मई 2008
फिर वही ' लोग कहते हैं'
अब तक स्वछंद चिड़िया आजाद इस गगन में
उड़ चली उधर ही जहां चाह आयी मन में
बंध गयी है उसकी उड़ानों की सीमा
एक अदद प्राणी से बंधकर है जीना
खतम आज उसकी भी आजादी हो रही है
लोग कहते हैं
शादी हो रही है।
उड़ चली उधर ही जहां चाह आयी मन में
बंध गयी है उसकी उड़ानों की सीमा
एक अदद प्राणी से बंधकर है जीना
खतम आज उसकी भी आजादी हो रही है
लोग कहते हैं
शादी हो रही है।
गुरुवार, 29 मई 2008
फिर वही ' लोग कहते हैं'
अब तक स्वछंद भंवरा, हर डाल पे चमन में
गाता रहा सुरीले हर गीत निज लगन में
फंस गया भंवर में भंवर भोला भाला
किया कैद उसको एक कली ने डाल माला
खतम आज उसकी आजादी हो रही है
लोग कहते हैं
शादी हो रही है।
गाता रहा सुरीले हर गीत निज लगन में
फंस गया भंवर में भंवर भोला भाला
किया कैद उसको एक कली ने डाल माला
खतम आज उसकी आजादी हो रही है
लोग कहते हैं
शादी हो रही है।
गुरुवार, 15 मई 2008
लोग कहते हैं लोग कहते हैं
तपती हुई प्रकृति गर्मी से झुलसकर,
सावन के आते ही वसुधा पे उतरकर
बादल की मशक लेकर तन मन को धो रही है
लोग कहते हैं बारिश हो रही है।
कुरूप हो न जाए जो हो गया है मैला
मौसम की धूल का न रहे दाग पहला
वसुंधरा अपने दामन को धो रही है
लोग कहते हैं बारिश हो रही है।
चांद और बदली में हो गयी खटपट
रूठी हुई बदरिया सूरज से करके घूंघट
सिसकियां भर भर के रो रही है
लोग कहते हैं बारिश हो रही है।
सावन के आते ही वसुधा पे उतरकर
बादल की मशक लेकर तन मन को धो रही है
लोग कहते हैं बारिश हो रही है।
कुरूप हो न जाए जो हो गया है मैला
मौसम की धूल का न रहे दाग पहला
वसुंधरा अपने दामन को धो रही है
लोग कहते हैं बारिश हो रही है।
चांद और बदली में हो गयी खटपट
रूठी हुई बदरिया सूरज से करके घूंघट
सिसकियां भर भर के रो रही है
लोग कहते हैं बारिश हो रही है।
शनिवार, 3 मई 2008
जानवरी ठिठोली
हाथी, ऊंट से
हाथी बोला ऊंट से तुम क्या लगते हो ठूंठ से
कमर में कूबड़ कैसा है गला गली के जैसा है
दुबली पतली काया है कब से कुछ नहीं खाया है
हर कोने से सूखे हो लगता बिलकुल भूखे हो
कहां के हो क्या हाल है लगता पड़ा अकाल है
ऊंट, हाथी से
ऐ भोंदूमल गोलमटोल मोटे तू ज्यादा मत बोल
सबसे ज्यादा खाया है तू खा खाकर मस्ताया है
फसलें चाहे अच्छी हों गन्ना हो या मक्की हो
तेरे जैसे हों दो चार तो हो जायेगा बंटाढार
जैसा अपना इण्डिया गेट देख देखकर तेरा पेट
समझ गये हम सारा हाल क्यों पड़ता है रोज अकाल
सब कुछ तू खा जायेगा तो ऊंट कहां से खायेगा
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