पुराने ज़माने के बच्चे, बच्चे नहीं थे
उनके संस्कार भी अच्छे नहीं थे
या उनकी नैतिक शिक्षा मैं कमी थी
या जहाँ वो जन्मे थे ज़हरीली ज़मीं थी
क्योंकि जो बात नेहरू ने -
पिछली सदी मैं कही थे
बिल्कुल सही थी
वरना कोई भी कैसे कह देता
आज के बच्चे, कल के नेता
शुक्रवार, 15 अगस्त 2008
गुरुवार, 31 जुलाई 2008
हां आ गया मैं भी और मेरा लैपटाप भी हां आ गया मैं और मेरा लैपटाप भी
प्रिय मित्रो
मैं भी वायरल से दो दो हाथ कर रहा था
और मेरा लैपटाप भी
अब आज हम दोनों स्वस्थ हैं
दोनों एक दूसरे को देखकर मस्त हैं
अब फिर होगी मुलाकात
फिर होगी कुछ बात
बना रहे आपका प्यार
संपर्क बना रहेगा लगातार
बाकी कल
अब नमस्कार
मैं भी वायरल से दो दो हाथ कर रहा था
और मेरा लैपटाप भी
अब आज हम दोनों स्वस्थ हैं
दोनों एक दूसरे को देखकर मस्त हैं
अब फिर होगी मुलाकात
फिर होगी कुछ बात
बना रहे आपका प्यार
संपर्क बना रहेगा लगातार
बाकी कल
अब नमस्कार
गुरुवार, 17 जुलाई 2008
सर्वोत्तम विश्व मित्रता सप्ताह
अपने दुश्मन को मित्र बनाने के हजार अवसर दो लेकिन अपने मित्र को दुश्मन बनने का एक भी मौका मत दो।
यह विश्व मित्रता सप्ताह है।
इस संदेश को अपने सभी मित्रों को तो भेजे हीं, दुश्मनों को भेजना भी मत भूलें।
मुझे भी अवश्य भेजें।
यदि आपको 10 से अधिक उत्तर प्राप्त होते हैं तो आप लवेवल अवेलेवल इंसान हैं ......... मुझे इंतजार रहेगा ......
आपके प्यारे से मित्रता संदेश का सर्वोत्तम विश्व मित्रता सप्ताह के पावन अवसर पर।
यह विश्व मित्रता सप्ताह है।
इस संदेश को अपने सभी मित्रों को तो भेजे हीं, दुश्मनों को भेजना भी मत भूलें।
मुझे भी अवश्य भेजें।
यदि आपको 10 से अधिक उत्तर प्राप्त होते हैं तो आप लवेवल अवेलेवल इंसान हैं ......... मुझे इंतजार रहेगा ......
आपके प्यारे से मित्रता संदेश का सर्वोत्तम विश्व मित्रता सप्ताह के पावन अवसर पर।
बुधवार, 16 जुलाई 2008
द्रोपदी राजी हुई हर हाल में
गीत लिखें हैं सभी धर्मों ने कुछ
बंध न पाये हैं कभी सुर-ताल में
एक की पत्नी बने या पांच की
द्रोपदी राजी हुई हर हाल में
गलतियां किसने करी कैसे हुईं
मंदोदरी विधवा हुई हर काल में
हर बार देखी है बदल कर दोस्तो
कुछ न कुछ कंकड़ मिले हर दाल में
लाख चौकस हो रहे हैं हर कदम
कुछ न कुछ धोखा हुआ हर माल में
आ गये ऋतुराज भी हर बार ही
कोंपलें फूटी नहीं हर डाल में
खूब फैंको प्यार से मनुहार से
मछलियां फंसती नहीं हर जाल में
वोट देना है संभलकर दोस्तो
भेडिये दिखते हमें हर खाल में
बंध न पाये हैं कभी सुर-ताल में
एक की पत्नी बने या पांच की
द्रोपदी राजी हुई हर हाल में
गलतियां किसने करी कैसे हुईं
मंदोदरी विधवा हुई हर काल में
हर बार देखी है बदल कर दोस्तो
कुछ न कुछ कंकड़ मिले हर दाल में
लाख चौकस हो रहे हैं हर कदम
कुछ न कुछ धोखा हुआ हर माल में
आ गये ऋतुराज भी हर बार ही
कोंपलें फूटी नहीं हर डाल में
खूब फैंको प्यार से मनुहार से
मछलियां फंसती नहीं हर जाल में
वोट देना है संभलकर दोस्तो
भेडिये दिखते हमें हर खाल में
मंगलवार, 24 जून 2008
रविवार, 15 जून 2008
आरुषि हत्याकाण्ड
कौन जाने क्या हुआ कैसे हुआ
आरुषि की मौत ने दिल को छुआ
प्रश्न जो उत्तर बिना हैं आज तक
क्यों मसल डाली कली कचनार की
कौन कहता आरुषि तू मर गयी
खूबसूरत जिंदगी से डर गयी
हर वक़्त रहती है नज़र के सामने
रोज बनती है खबर अखबार की
आरुषि की मौत ने दिल को छुआ
प्रश्न जो उत्तर बिना हैं आज तक
क्यों मसल डाली कली कचनार की
कौन कहता आरुषि तू मर गयी
खूबसूरत जिंदगी से डर गयी
हर वक़्त रहती है नज़र के सामने
रोज बनती है खबर अखबार की
रविवार, 8 जून 2008
तितली की सलाह
तितली तू क्या खाती है, ये रंग कहां से लाती है
कर श्रंगार दुल्हन जैसा, तू रोज कहां पर जाती है
क्यों प्रश्न उठा तेरे मन में, मैं जाती हूं वन-उपवन में
ये असर हुआ है फूलों का जो रंग भरें मेरे जीवन में
तुम भी उपवन तैयार करो फूलों पौधों से प्यार करो
जीवन में रंग सजेंगे खुद तुम जीवों पर उपकार करो
कर श्रंगार दुल्हन जैसा, तू रोज कहां पर जाती है
क्यों प्रश्न उठा तेरे मन में, मैं जाती हूं वन-उपवन में
ये असर हुआ है फूलों का जो रंग भरें मेरे जीवन में
तुम भी उपवन तैयार करो फूलों पौधों से प्यार करो
जीवन में रंग सजेंगे खुद तुम जीवों पर उपकार करो
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